सांसारिक सुख क्षणभंगुर है। तात्कालिक है। वह सत्य नहीं है। यह माया के अधीन है। यह समाप्त हो जाता है। क्षणिक है। सब कुछ माया के अंतर्गत है। मन को चंचल न होने दो। मन को वैराग्य से पोषित करो। वैराग्य और ज्ञान यही दो अस्त्र हैं जिनसे ईश्वर प्राप्ति की जा सकती है।
योग का साधन लो। व्यवाहरिक साधन अपनाए। प्राणायाम , ध्यान , संगीत , लेखन का अवलम्बन करो।
ठाकुरजी का साथ लो। स्वामीजी का संग करो। यही मोक्ष तक पहुचाएंगे।
ScientistBaba03
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