गोरा गुरुदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर जी की उत्कृष्ट रचना है.ये गुरुदेव की पहली कृति है जिसका मैने अध्ययन किया है. उपन्यास मैं काफ़ी समय से पढ़ रहा था . अब जाके पूरा हुआ है. निस्संदेह साहित्यिक दृष्टि से ये गुरुदेव की सर्वोत्तम कृति है. तत्कालिन समय की समाजिक एवम राजनीतिक परिस्थितियाँ इस साहित्य कृति से दृष्टिगोचर होती हैं. गुरूदेव ने समाजिक परिस्थितियों का बहुत शान्दार वर्णन किया है. समस्या एवम समाधान भी दिया है. राष्ट्रवाद की भी बात की है लेकिन उसके लिए कोई उपाय नहीं सुझाया है..... ..ऐसा लगता है कि कुछ अधूरा-सा रह गया है यद्यपि ये गुरुदेव की पहली कृति है जिसका मैने अध्ययन किया है...... गोरा जो कि मुख्य पात्र है उसे जातिवाद एवं क्षेत्रवाद से ऊपर रखकर राष्ट्रवाद की जो परिकल्पना की गयी है वह अतुलनीय है। परेश बाबू, विनय, वरदासुंदरी, सतीश,हरिमोहिनी,सुचरिता एवं अन्य पात्र जीवंत प्रतीत होते हैं। तत्कालिन ब्रह्म समाज का भी अतुलनीय विवरण है.
Undoubtedly, Nobel Laureate Gurudev is correctly known as Icon of Indian Culture
ScientistBaba03
Only 3P's: Patience Purity Perseverance i.e. All....
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