Monday, 23 October 2017

मन

प्रख्यात साहित्यकार जॉर्ज  बर्नार्ड  शा भी मन को दुरूस्त रखने की वकालत करते थे. वह तो यहां तक कहते कि 'लोग मरते तो बहुत पहले हैं, लेकिन दफ़्नाए बहुत बाद में जाते हैं. मरने और दफ़्नाने में कोई 30 साल का फ़र्क हो जाता है. ' वह जानते थे कि आदमी चुनौतीयो के सामने बहुत पहले ही घुटने टेक देता है और फिर जीवन को रेंगता हुआ जीता है.  क्या आप चाहेंगे कि द्फ़्नाने के 30 साल पहले ही आप मर जाएं.

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ScientistBaba03